अंतरराष्ट्रीयराजनीतिराष्ट्रीय

G7 समिट 2026: वैश्विक निर्णयों का केंद्र बनता भारत, पीएम मोदी की उपस्थिति ने फिर दर्ज कराई मजबूत धमक।

अजय सिंह
फ्रांस के एवियन शहर में आयोजित हो रहे G7 शिखर सम्मेलन (2026) से वैश्विक कूटनीति की एक नई और बेहद मजबूत तस्वीर सामने आई है। इस हाई-प्रोफाइल बैठक में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की मौजूदगी ने एक बार फिर अंतरराष्ट्रीय पटल पर नई दिल्ली के बढ़ते रसूख को रेखांकित किया है। पीएम मोदी के लिए जहाँ व्यक्तिगत रूप से इस मंच पर यह लगातार सातवां मौका है, वहीं भारत ने कुल 13वीं बार इस प्रतिष्ठित समिट में शिरकत की है। यह आंकड़े इस बात का जीवंत प्रमाण हैं कि भारत अब सिर्फ एशिया उपमहाद्वीप तक सीमित नहीं रहा, बल्कि वैश्विक नीति-निर्धारण में एक मुख्य खिलाड़ी बन चुका है।

बहुपक्षीय मंच पर भारत का विज़न और वैश्विक चिंताएं
समिट के दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने “नए गठबंधनों का निर्माण और अंतरराष्ट्रीय एकजुटता की बहाली” (Forging New Partnerships and Rebuilding International Solidarity) विषय पर आयोजित सत्र को संबोधित किया। अपने संबोधन में उन्होंने एक सुरक्षित, शांतिपूर्ण और सतत भविष्य का रोडमैप पेश किया। आज के दौर में जब दुनिया आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), साइबर सुरक्षा, एनर्जी सिक्योरिटी और क्लाइमेट चेंज जैसी गंभीर चुनौतियों से जूझ रही है, तब पीएम मोदी ने साफ कर दिया कि इन मसलों पर भारत के रुख के बिना कोई भी वैश्विक समाधान मुमकिन नहीं है।

‘ग्लोबल साउथ’ की बुलंद आवाज़
इस बार के G7 सम्मेलन में भारत की भूमिका केवल अपने एजेंडे को आगे बढ़ाने तक सीमित नहीं दिखी। प्रधानमंत्री ने बेहद मजबूती के साथ विकासशील और कम विकसित देशों यानी ‘ग्लोबल साउथ’ की आवाज को दुनिया के सबसे अमीर देशों के सामने रखा। उन्होंने याद दिलाया कि वैश्विक समृद्धि तब तक अधूरी है जब तक विकासशील देशों की बुनियादी समस्याओं का समाधान नहीं होता। इस तरह भारत ने अमीर और गरीब देशों के बीच एक मजबूत कूटनीतिक सेतु (ब्रिज) की भूमिका निभाई है।

द्विपक्षीय मुलाकातों से मजबूत होते रिश्ते
इस दौरे की एक और बड़ी यूएसपी (USP) प्रधानमंत्री मोदी की अन्य शीर्ष राष्ट्राध्यक्षों के साथ हुई रणनीतिक बैठकें रहीं। उन्होंने:
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के साथ रणनीतिक साझेदारी पर बात की।
ब्रिटेन के प्रधानमंत्री कियर स्टार्मर और कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी के साथ व्यापारिक व कूटनीतिक मुद्दों पर चर्चा की।
यूएई के राष्ट्रपति के साथ ऊर्जा और क्षेत्रीय सुरक्षा जैसे अहम विषयों पर विचारों का आदान-प्रदान किया।
ये उच्च स्तरीय मुलाकातें आने वाले समय में वैश्विक शांति, व्यापार और ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग के नए रास्ते खोलने का दम रखती हैं।

वैश्विक निर्णयों का केंद्र बनता भारत: G7 समिट में भारत की यह सक्रिय भागीदारी महज एक औपचारिक राजनयिक दौरा नहीं है। यह दुनिया को दिया गया एक सीधा और स्पष्ट संदेश है कि समकालीन विश्व व्यवस्था में भारत की राय बेहद मायने रखती है। आज के दौर में वैश्विक मंच पर कोई भी बड़ा फैसला भारत को विश्वास में लिए बिना अधूरा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button