
अजय सिंह
आज, 21 जून 2026 को वैश्विक स्तर पर 12वां अंतरराष्ट्रीय योग दिवस पूरे उत्साह और गरिमा के साथ मनाया जा रहा है। इस वर्ष अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के मुख्य राष्ट्रीय समारोह का आयोजन जम्मू-कश्मीर की राजधानी श्रीनगर में डल झील के किनारे स्थित ‘शेर-ए-कश्मीर इंटरनेशनल कन्वेंशन सेंटर’ में किया गया, जहां स्वयं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने हजारों साधकों के साथ इस विशेष सत्र का नेतृत्व किया।
“योग केवल एक विधा नहीं, बल्कि विचार और जीवन जीने की शैली है” – पीएम मोदी
श्रीनगर में कार्यक्रम को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने योग की वैश्विक स्वीकार्यता और इसके महत्व पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि आज दुनिया भर में योग करने वालों की संख्या लगातार बढ़ रही है और यह वैश्विक कल्याण का एक बड़ा माध्यम बन चुका है।
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा:
“योग हमें वर्तमान क्षण में जीना सिखाता है। यह केवल एक शारीरिक क्रिया या कसरत नहीं है, बल्कि यह मन, शरीर और आत्मा के संतुलन की यात्रा है। आज जब दुनिया मानसिक तनाव और स्वास्थ्य चुनौतियों से जूझ रही है, तब योग ‘स्वस्थ समाज और सशक्त राष्ट्र’ के निर्माण में सबसे बड़ी शक्ति के रूप में उभर रहा है।”
डल झील के किनारे सामूहिक योगाभ्यास
संबोधन के उपरांत, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कॉमन योग प्रोटोकॉल के तहत वहां उपस्थित नागरिकों, योग गुरुओं और युवाओं के साथ सामूहिक योगाभ्यास किया। इस सत्र के दौरान प्रधानमंत्री ने विभिन्न आसनों और प्राणायाम के महत्व को रेखांकित किया:
शारीरिक लचीलेपन के लिए: ताड़ासन, वृक्षासन और पादहस्तासन का अभ्यास किया गया।
मानसिक शांति के लिए: कपालभाति, अनुलोम-विलोम और भ्रामरी प्राणायाम के जरिए एकाग्रता का संदेश दिया गया।
प्रधानमंत्री ने आयोजन के बाद वहां मौजूद युवाओं और स्थानीय नागरिकों से मुलाकात कर उनका उत्साहवर्धन भी किया।
इस वर्ष का मुख्य संकल्प: “योगा फॉर सेल्फ एंड सोसाइटी” (स्वयं और समाज के लिए योग)
इस वर्ष के अंतरराष्ट्रीय योग दिवस की मुख्य थीम/संकल्प “योगा फॉर सेल्फ एंड सोसाइटी” पर आधारित है। यह विषय इस बात पर जोर देता है कि योग न केवल व्यक्तिगत शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाता है, बल्कि समाज में सद्भाव, शांति और सामूहिक कल्याण की भावना को भी विकसित करता है।
देश भर के विभिन्न हिस्सों में भव्य आयोजन
प्रधानमंत्री के श्रीनगर कार्यक्रम के साथ-साथ आज देश के सभी प्रमुख रणनीतिक, ऐतिहासिक और सांस्कृतिक स्थलों पर योग कार्यक्रमों का आयोजन किया गया:
सशस्त्र बलों का पराक्रम: भारतीय सेना के जवानों ने हिमालय की बर्फीली चोटियों पर और नौसेना के जवानों ने समुद्र के बीचो-बीच जहाजों पर योग कर देश की सांस्कृतिक चेतना का प्रदर्शन किया।
आध्यात्मिक स्थलों पर योग: देश के सभी प्रमुख 75 ऐतिहासिक धरोहरों और आध्यात्मिक केंद्रों पर केंद्रीय मंत्रियों और स्थानीय मुख्यमंत्रियों की उपस्थिति में सामूहिक योग सत्र आयोजित हुए।
आज का यह दिन दुनिया को भारत की प्राचीन विधा और स्वास्थ्य के प्रति उसकी अटूट प्रतिबद्धता से दोबारा परिचित कराने का एक सशक्त माध्यम बना है।



